सपनों को जीनें की नहीं अस्तित्व को बचाने की कहानी है ‘Pink’ और ‘Parched’
Pink and Parched storyनाइट शिफ्ट का बोझ भरा था सिर में हल्का दर्द भी हो रहा था लेकिन, अब और भी भयंकर हो गया, खुपड़िया झन्ना गई। कल देखे थे Pink और आज देख ली Parched, कल वाली का भूत अभी उतरा भी नहीं था कि इसने और चढ़ा दिया। जैसे-तैसे आंखों को अपने वश…